مقالات

 हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की फ़ज़ीलतें अहले सुन्नत की किताबों से
रसूले की इकलौती बेटी और इमामत एवं रिसालत को मिलाने वाली कड़ी, वह महान महिला जिसकों सारी दुनियां की औरतों का सरदार कहा गया, रसूल जिसका इतना सम्मान करते थे कि आपने म्मेअबीहा यानी अपने बाप की मां कहा, इमामत की सुरक्षा में शहीद होने वाली पहली महिला, वह महिला
अमोनिया गैस प्लांट
लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ एक नई परमाणु रणनीति तैयार कर रहे हैं।
फ़िलिस्तीन का तीसरा इन्तिफ़ाज़ा
फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईली अत्याचार के विरुद्ध जारी प्रतिरोध और फ़िलिस्तीन के तीसरे इन्तेफ़ादा (क्रांति) के बारे में अरब देशों के साथ साथ विश्व कि भिन्न देशों ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
सन 1979 में ईरान में क्रांति सफल हुई और ढाई हज़ार साल से जारी राजशाही का अंत हो गया, लेकिन इस राजशाही के अंत के साथ ही अमरीका और इस्राईल के लिए ईरान नामक "दुधारू गाय" ने दूध देना भी बंद कर दिया।
सही बुख़ारी
अगर मान भी लिया जाए कि बीबी ज़हरा कुछ समय के लिए शेख़ैन नाराज भी हुईं थीं, लेकिन यह भी अपने स्थान पर साबित है कि बीबी ज़हरा के जीवन के अंतिम दिनों में शेख़ैन बीबी के पास आए और उनसे क्षमा मांग कर उन्हें प्रसन्न कर लिया था, जैसा कि बयाकी और दूसरों ने नकल कि
ट्रंप
जर्मनी के एस समाचार पत्र ने ट्रंप द्वारा सात मुसलमान देशों के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर प्रतिबंध अरब देशों की चुप्पी और उसके विरुद्ध कुछ पूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया रिपोर्ट पेश की है।
ख़ुत्ब ए ग़दीर
ग़दीर का पूरा ख़ुत्बा, मौज़ूआत के साथ
तीसरा ख़लीफ़ा कौन?
अल्लाह के शहर मक्के में मैं टहल रहा था कि देख कुछ वहाबी मेरी तरफ़ आ रहे हैं मैं समझ गया कि कोई चक्कर है, वह मेरे पास आए और कुछ सवाल जवाब के बाद पूछाः बताओ पहला ख़लीफ़ा कौन है? मैं: हज़रत अबू बक्र। वहाबीः शाबाश। दूसरा ख़लीफ़ा कौन है? मैं: हज़रत उमर
रफसंजानी
इसमें कोई संदेह नहीं है कि हाशमी रफसंजानी ईरान की इस्लामी क्रांति के बाद ईरानी राजनीतिक के बहुत बड़े खिलाड़ी रहे हैं जिनकी सियासत इस प्रकार की रही है कि हमेशा लोग उनके समर्थन या फिर विरोध में खड़े दिखाई देते है, क्योंकि उनकी सिसायत का सबसे बड़ा पहलू यह है
ग़दीर का संदेश
१८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने
ग़दीर क्या है
ग़दीर का मतलब है इल्म, सदाचार, परहेज़गारी और अल्लाह के रास्ते में क़ुर्बानी और बलिदान और इस्लाम के मामले में दूसरों से आगे बढ़ना और उन्हीं चीज़ों के आधार पर समाज की सत्ता का निर्माण करना, यह एक मूल्य सम्बंधी मुद्दा है। इन मानों में गदीर केवल शियों के लिए
आयतुल्लाह ख़ामेनेई
एक हदीस है जिसे हम (हदीसे उख़ूवत) के नाम से पहचानते हैं वह हज़रत अली (अ) के बुलंद मक़ाम की गवाही देती है। इस हदीस का माजरा कुछ इस तरह है कि जब रसूले ख़ुदा तमाम मुहाजिर व अंसार को एक दूसरे का भाई बना रहे थे तब आपने हज़रत अली (अ) को अपना भाई बनाया
ग़दीर का महत्व
सूले इस्लाम को मालूम था कि इस सफ़र के अंत में उन्हें एक महान काम को अंजाम देना है जिस पर दीन की इमारत तय्यार होगी और उस इमारत के ख़म्भे उँचे होंगे कि जिससे आपकी उम्मत सारी उम्मतों की सरदार बनेगी, पूरब और पश्चिम में उसकी हुकूमत होगी मगर इसकी शर्त यह है कि
विलायत
इस्लाम में विलायत अर्थात संरक्षण एवं सरपरस्ती पैग़म्बरी की निरंतरता एवं ऐसे दीप की भांति है कि जो अंधेरों को छांट देता है और सच्चाई एवं वास्तविकता के प्रतीक के रूप में मनुष्यों का मार्गदर्शन करता है। जिस किसी पर भी विलायत का प्रकाश पड़ जाता है तो मानो वह
ग़दीर के आमाल
ग़दीर का दिन वह महान दिन है जिसमें सभी शिया बल्कि सच्चाई को चाहने वाला हर व्यक्ति प्रसन्न होता है यह वही दिन है जिस दिन रसूले इस्लाम (स) ने जह से पलटते समय ग़दीर के मैदान में इस्लामी दुनिया के सबसे बड़ा और महत्व पूर्ण संदेश दिया यही वह दिन है जिस दिन...
ग़दीर
ग़दीर मक्के से 64 किलोमीटर दूरी पर स्थित अलजोहफ़ा घाटी से तीन से चार किलोमीटर दूर एक स्थान था जहां पोखरा था। इसके आस पास पेड़ थे। कारवां वाले इसकी छाव में अपनी यात्रा की थकान उतारते और स्वच्छ पानी से अपनी प्यास बुझाते थे। समय बीतने के साथ यह छोटा का पोखरा
इस्लामी एकता
ग़दीर या उस से मुतअल्लिक़ हदीस या वाक़ेयात पर तबसेरा या तज़किरा बाज़ हज़रात को मनाफ़ी ए इत्तेहाद नज़र आता है। बहुत से ज़ेहनों में यह बात भी आती होगी कि ग़दीर के ज़िक्र के साथ यह इत्तेहाद, जो हम मुख़्तलिफ़ इस्लामी फ़िरक़ों में वुजूद में लाना चाहते हैं, कैस
ग़दीर का महत्व
दसवीं हिजरी क़मरी का ज़माना था। पैग़म्बरे इस्लाम ने हज का एलान किया और लोगों को यह कहलवा भेजा कि जिस जिस व्यक्ति में हज करने की क्षमता है वह ज़रूर हज करे क्योंकि ईश्वर के दो संदेश अभी भी संपूर्ण रूप में लोगों तक नहीं पहुंचे थे। एक हज और दूसरा पैग़म्बरे इस
शेख़ निम्र
मोहम्मद अन्निम्र शेख़ निम्र के साथ अंतिम मुलाक़ात के बारे में कहते हैं: मैं, मेरी माँ, हमारे भाई और मेरी बहन शेख़ निम्र की बेटी सकीना के साथ सुबह ही रियाज़ की जेल हाएर पहुँच गए, लेकिन उन्होंने हमको 12 बजे दिन तक मिलने नहीं दिया मेरी माँ और भाई अबू मूसा पर
शेख़ निम्र
निम्र बाक़िर अलनिम्र 1959 ईसवी में सऊदी अरब के अलअवामिया में एक धार्मिक घराने में पैदा हुए (1) आप एक शिया मुज्तहिद (2) और सऊदी अरब के सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता थे (3) आपने अपनी आरम्भिक शिक्षा अलअवामिया में ही ग्रहण की उसके बाद 1989 में धार्मिक शिक्षा..

पृष्ठ