हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की फ़ज़ीलतें अहले सुन्नत की किताबों से
रसूले की इकलौती बेटी और इमामत एवं रिसालत को मिलाने वाली कड़ी, वह महान महिला जिसकों सारी दुनियां की औरतों का सरदार कहा गया, रसूल जिसका इतना सम्मान करते थे कि आपने म्मेअबीहा यानी अपने बाप की...
सही बुख़ारी और मुस्लिम में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के मसाएब
सही बुख़ारी और मुस्लिम में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के मसाएब
फ़िदक छीनने पर हज़रत फ़ातेमा (स) का अबूबक्र पर क्रोधित होना
जब पहले ख़लीफ़ा ने उनको फ़िदक वापस नहीं दिया और यह हदीस पढ़ी कि पैग़म्बर ने फ़रमाया है कि हम अंबिया मीरास नहीं छोड़ते हैं और जो कुछ छोड़ते हैं वह सदक़ा है तो आप बहुत क्रोधित होती हैं और...
फ़िदक क्या है और पैग़म्बर को कैसे मिला?
हमको यह जान लेना चाहिए कि फ़िदक एक बहुत ही आबाद और उपजाऊ धरती थी जो यहूदियों की सम्पत्ती थी, हिजाज़ में कुछ यहूदी रहते थे और वह पैग़म्बर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे जैसा कि स्वंय क़ुरआन...
मीलादुन्नबी, 17 रबीउल अव्वल
सुन्नी मुसलमानों के अनुसार रसूले ख़ुदा का जन्म 12 रबीउल अव्वल को हुआ था जबकि शियों का मानना है कि हज़रत का जन्म 17 रबीउल अव्वल को हुआ था। इसलिए ईरान में शिया और सुन्नी विद्वानों के...
क्या पैग़म्बरे इस्लाम पर सलाम पढ़ना शिर्क है?
आज के युग में यह वहाबी टोला और उसके साथियों ने क़सम खा रखी है कि मुसलमानों की हर आस्था और उनके हर विश्वास पर टिप्पणी अवश्य करेंगे चाहे वह सही हो या न हो, और कितने आश्चर्य की बात है कि यह सब...
हज़रत मोहसिन की शहादत कैसे हुई, जानें शिया और सुन्नी किताबों से
शिया और सुन्नी स्रोतों में मौजूद ऐतिहासिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि हज़रत मोहसिन इमाम अली और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.) की संतान थे जो दूसरे ख़लीफ़ा उमर या क़ुनफ़ुज़ द्वारा हज़रत फ़ातेमा...
इमाम सादिक़ (अ) की संक्षिप्त जीवनी
सुन्नी समुदाय के प्रसिद्ध विद्वान अबु हनीफ़ा कहते हैं कि मैं ने हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से बड़ा कोई विद्वान नही देखा। वह यह भी कहते हैं कि अगर मैं हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्लाम से दो...
इमाम सादिक़ (अ) की सियासत
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के युग में बनी उमय्या और बनी अब्बास के बीच सत्ता प्राप्त करने के लिए खींचा तानी चल रही थी, और इस मौक़े से लाभ उठाते हुए इमाम सादिक़ (अ) और आपके पिता इमाम बाक़िर (अ) ने...
इमाम हसन अस्करी (अ) की कुछ मार्गदर्शक हदीसें
हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलामने कहा कि समस्त बुराईयों को एक कमरे मे बन्द कर दिया गया है, व इस कमरे की चाबी झूट को बनाया गया है। अर्थात झूट समस्त बुराईयों की जड़ है।
इमाम हसन अस्करी की शहादत पर विशेष
हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम ने अपने जीवन में कुल 28 बसंत देखे किन्तु इस छोटी सी ज़िन्दगी में भी उन्हों ने पवित्र क़ुरआन की आयतों की व्याख्या और धर्मशास्त्र पर आधारित अपनी यादगार रचना...
ख़ुत्ब ए फ़िदक का हिन्दी अनुवाद
और तुम यह समझते हो कि हम अहलेबैत का मीरास में कोई हक़ नहीं है! क्या तुम लोग जाहेलियत का आदेश जारी कर रहे हो?! और ईमान वालों के लिए ईश्वरीय आदेश से बेहतर क्या आदेश हो सकता है? क्या तुम लोग...
फ़िदक कैसे छीना गया?
हैसमी अपनी पुस्तक मजमउज़्ज़वाएद की जिल्द 9 पेज 40 पर लिखता हैः फ़िदक को फ़ातेमा (स) से लेने से पहले दूसरे ख़लीफ़ा (हज़रत उमर) अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली(अ) के पास जाते हैं और आपसे पैग़म्बर (स...
फ़िदक किसकी प्रापर्टी है?
सोंचने की बात है कि अरब का वह रेगिस्तान कि जहां अगर ज़मज़म जैसा एक चश्मा जारी हो जाए तो वहां पूरी एक बस्ती आबाद हो जाती है अलग अलग स्थानों से लोग रहने के लिए आ जाते हैं तो अगर किसी स्थान पर...
वहाबियत का काला इतिहास मदीने पर हमला
मक्के पर अतिग्रहण के बाद सऊद ने पवित्र नगर मदीने पर क़ब्ज़ा करने के बारे में सोचा और इस पवित्र नगर का भी परिवेष्टन कर लिया किन्तु वहाबियों की भ्रष्ट आस्थाओं व हिंसाओं से अवगत, मदीनावासियों...
वहाबियत की सच्चाई
मुसलमान वही है जो दूसरो कि सहायता करता है, यहीं से ये बात भी समझ में आती है कि मुसलमान किसी को नुक़सान नही पहुँचाता, अब अगर कोई किसी को नुक़सान पहुँचाकर ये समझता रहे कि वो मुसलमान है तो ये...
 नमाज़े ग़ुफ़ैला पढ़ने का तरीक़ा
मुस्तहब्बी नमाज़ों में से एक नमाज़े ग़ुफ़ैला है, जो मग़रिब व इशा की नमाज़ के बीच पढ़ी जाती है। इसका वक़्त नमाज़े मग़रिब के बाद पश्चिम की तरफ़ की सुर्ख़ी ख़त्म होने तक है।
माँ बाप की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी नमाज़ सिखाना
रिवायत मे बयान किया गया है कि बच्चों को नमाज़ सिखाना माँ बाप की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। माता पिता को चाहिए कि जब बच्चा तीन साल का हो जाये तो इसको ला इलाहा इल्लल्लाह जैसे वाक्य याद कराएं।...
इमाम रज़ा (अ.) की मार्गदर्शक हदीसें
रिवायत में आया है कि अहलेबैत ने फ़रमाया कि हमारी हदीसों और कथनों को सुनों और दूसरों को सुनाओ क्योंकि यह दिलों को रौशन करती हैं।
शियों के लिए इमाम रज़ा (अ.) का संदेश
हे अब्दुल अज़ीम मेरी तरफ़ से मेरे दोस्तों के यह संदेश देना और उनसे कहना कि शैतान को स्वंय पर नियंत्रण ना करने दें और उनको आदेश देना कि बोलने और अमानत में सच्चाई रखें, और जो चीज़ उनके काम की...
सैरो तफ़रीह इमाम रज़ा (अ.) की निगाह में
इस दुनिया में हर व्यक्ति को सैर, तफ़रीह और ख़ुशी की आवश्यक्ता होती है हर इन्सान अपने जीवन में प्रसन्न रहना चाहता है और अगर यह सैर, तफ़रीह और प्रसन्नता अपनी हद से आगे ना निकल जाए और इन्सान...
म्यंमार, मुसलमानों पर टूट रहा है सैनिकों का कहर, अब तक हज़ारों पलायन को मजबूर
संयुक्त राष्ट्रसंध ने घोषणा की है कि म्यंमार के राख़ीन प्रांत में मुसलमानों के मानवाधिकारों की स्थिति दिन-प्रतिदिन बहुत तेज़ी से बिगड़ती जा रही है।
इमाम हसन (अ.)की दया एवं दानशीलता
इतिहास में आया है कि किसी भी ग़रीब व फ़क़ीर को उन्होने अपने पास से बिना उसकी समस्या का समाधान किये जाने नहीं दिया। किसी ने सवाल किया कि आप किसी मांगने वाले को कभी ख़ाली हाथ क्यों नहीं...
हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम का संक्षिप्त जीवन परिचय
हज़रत इमाम हसन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम तथा आपकी माता हज़रत फ़ातिमा ज़हरा थीं। आप अपने माता पिता की प्रथम संतान थे।
वह शर्तें जिनके आधार पर इमाम हसन ने मोआविया से सुलह की
मोआविया के बाद सत्ता इमाम हसन अलैहिस्सलाम की ओर हस्तान्त्रित होगी व इमाम हसन अलैहिस्सलाम के न होने की अवस्था में सत्ता इमाम हुसैन को सौंपी जायेगी। मोआविया को यह अधिकार नहीं है कि वह अपने...
पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का संसारिक जीवन
इमाम अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं अपने पवित्र नबीं का अनुसरण करो! पैग़म्बर ने इस संसार में केवल आवश्यकता भर चीज़ों का उपयोग किया, अपनी निगाहों को उस पर नहीं टिकाया, अपने मुंह को उससे नहीं...
पैग़म्बरे अकरम (स.) की भविष्यवाणी
पैग़म्बरे अकरम ने फ़रमाया कि मेरे बाद जब दनिया में....
पैग़म्बर की ज़ियारत मुशरिक बनाती है!!
सलफी एवं वहाबी पंथ की बुनियाद रखने वाला इब्ने तय्मिया पैग़म्बरे इस्लाम की पावन समाधि के दर्शन को हराम और क़ब्र का दर्शन करने के इरादे से की जाने वाली यात्रा को भी हराम समझता है। वह...
इमाम हसन (अ) की हदीसें
निःसंदेह सबसे अधिक देखने वाली आखें वह है जो नेक रास्ते को देख लें, और सबसे अधिक सुनने वाले कान वह हैं जो नसीहत सुने और उसने फ़ायदा उठाएं, सबसे स्वस्थ दिल वह हैं जो संदेह से पवित्र हो।
पैग़म्बरे इस्लाम के छः विशेषताएं
पैग़म्बरे इस्लाम के छः विशेषताएं
नाना की वफ़ात और नवासे की शहादत एक ही दिन
पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा अपने स्वर्गवास से पहले इस्लाम को परिपूर्ण धर्म के रूप में मानवता के सामने पेश कर चुके थे।
पैग़म्बरे इस्लाम और इमाम हसन की शहादत पर विशेष
पैग़म्बरे इस्लाम (स) का स्वर्गवास हुए चौदह सौ वर्ष का समय बीत रहा है परंतु आज भी दिल उनकी याद व श्रृद्धा में डूबे हुए हैं। डेढ अरब से अधिक मुसलमान प्रतिदिन अपनी नमाज़ों में पैग़म्बरे इस्लाम...
हज़रत इमाम रज़ा का संक्षित्प परिचय
हज़रत इमाम रज़ा का संक्षित्प परिचय
इमाम रज़ा (अ) की शहादत पर खास
पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम अपने समय में ज्ञान, समस्त सदगुणों और ईश्वरीय भय व सदाचारिता के प्रतीक थे। इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम भी दूसरे इमामों की भांति अत्याचारी...
इमाम हुसैन (अ) और करबला
इमाम हुसैन (अ) की शहादत के बाद से मोहर्रम केवल एक महीने का नाम नहीं रह गया बल्कि यह एक दुखद घटना का नाम है, एक उसूल व सिद्धांत का नाम है और सबसे बढ़कर सच्चाई व झूठ, ज़ुल्म तथा बहादुरी की...