मुक़दता सद्र को हटाना किस राजनीतिक पार्टी के हित में होगा?

मुकतदा सद्र
2003 में सद्दाम के फ़िलाफ इराक में सैन्य हमले के बाद इस देश के शियों दबे कुचले शियों को राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखने का अवसर प्रदान कर दिया।

 

 

आईयूवीएम प्रेस। 2003 में सद्दाम के फ़िलाफ. इराक में सैन्य हमले के बाद इस देश के शियों दबे कुचले शियों को राजनीतिक क्षेत्र में कदम रखने का अवसर प्रदान कर दिया। आरम्भ से ही अमरीका के नेतृत्व में अरबी-पश्चिमी मोर्चा ने शिया समूहों में से किसी एक समूह को अपना मजबूत सहयोगी बनाने की कोशिशें शुरू कर दीं, लेकिन इराक के धार्मिक नेतृत्व द्वारा देश में एकता बनाए रखने पर ज़ोर दिया जाना और ब्रिटिश एवं अमरीकी आक्रमणकारियों को देश से बाहर निकालने पर रोज़ दिए जाने के कारण अमरीका अपने लिए एक शिया सहयोगी पार्टी बनाने में सफल नहीं हो सका।

इस बीच इन समूहों में से सर्वोपरि समूह जिसने अपने राजनीतिक एजेंडा के तौर पर प्रतिरोध की रणनीति अपनाई वह, मुक़तदा सद्र की अध्यक्षता में जैशुल महदी (अज्लल्लाहो पालह फ़रजहुश) थी, एक धार्मिक शिक्षा ग्रहण करने वाला विद्यार्थी जिसने ईरान के समर्थन और प्रशिक्षण से एक छोटी सी सेना बनाई और ईरान की सैन्य सलाहों और हथियारों का प्रयोग करते हुए वर्षों तक इराक़ में अमेरिका और उसके हितों के विरुद्ध लड़ते रहे। मुक़दता सद्र जो कि इराक के प्रसिद्ध «सद्र» परिवार से संबंध रखते हैं, उन्होंने ईरान में शिक्षा प्राप्त की थी, और लगभग आधा साल ईरान में ही बिताया करते थे, मुक़तदा सद्र सद्दाम सरकार के बाद से ईरान के सर्वश्रेष्ठ सहयोगी हैं, और कई बार ईरान के साथ सहयोग भी किया है।

इन गतिविधियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन, शिया मुजतहिद आयतुल्लाह ख़ूई के बेटे मजीद ख़ूई की सद्र समर्थकों के हाथों हत्या होने के और इराक़ में उन पर मुक़दमा होने के बाद शुरू हुई थी, ईरान ने उन्हें इराक़ से निकाल कर अपने देश में पनाह दी, ताकि वह अमरीका की विरुद्ध अपने कार्यों को जारी रख सकें।

इराक में शिया समूहों के राजनीतिक मैदान में उतर कूदने से सऊदी अरब की क्षेत्रीय राजनीति में बदलाव आना शुरू हो गई, क्योंकि रियाज़ को इस प्रकार का इराक पसंद नहीं था, इसलिए अब सउदी राजकुमार के अनुसार इराक को कम से कम राजनीति स्तर पर कमज़ोर और इराक़ को ईरान की तरफ़ जाने से रोका जा सके, लेकिन कैसे?

नए हालात में सऊदी अरब की तरफ़ से नई रणनीति की ज़रूरत थी ताकि वह इराकी राजनीति में होने वाले बदलाव के साथ ठाल सके। इराक़ी पार्लिमेंट में सऊदी समर्थक सुन्नी पार्टियों का वजूद में आना  और उसी के साथ ही सुन्नी विचारधारा वाले विद्रोही गुटों का अस्तित्व में आना जो मौसुल, अलअंबार और सलाहुद्दी जैसे क्षेत्रों में सद्दाम की रीत आगे बढ़ा रहे थे, यह वह सब चीज़ें थीं जिनको सऊदी अरब की तरफ़ से इराक़ की डोमोक्रेसी को नष्ट किए जाने वाली रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है।

और वर्तमान स्थिति में रियाज़ की राजनीति का नया एजेंडा इराक में शिया समूहों को आपस में लड़वाना है। प्रत्येक लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद होते हैं यह एक स्वाभाविक बात है, लेकिन सऊदी अरब इस बात का लाभ उठाना चाहता है क्योंकि सऊदी अपने पड़ोस में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था नहीं चाहता है इसलिए सऊदी शासन के क़रीबी जज़ीरा और अलअरबिया जैसे चैनलों इन मतभेदों को इराक में हवा देनी शुरू की और इन मतभेदों को बड़ा करके दिखाना और मुक़दता सद्र के नेतृत्व में इराक़ी विरोधियों को के विघटन और प्रतिक्रिया स्वरूप शियों के बीच शक्ति प्राप्त करने के लिए खूनी लड़ाई का सामने आना, दूसरे शब्दो में कहा जाए, सऊदी अरब इराक़ में उठने वाली सुधार की लहरों पर सवार हो कर शिया पार्टियों के राजनीतिक मतभेदों को अपने हित में प्रयोग करना चाहता है।

पिछले कुछ समय से सऊदी अरब की यह कोशिश रही है कि आयतुल्लाह ख़ूई के बेटे की हत्या का मसला उठाकर ईरान को मुक़दता सद्र का समर्थन करने वाला दिखा सके। लेकिन सच्चाई यह है कि मुक़दता सद्र का जाना निसंदेह ईरान और प्रतिरोध के लिए हानि होगी और जैशुल महदी जिसको अब सराया अलसलाम के नाम से जाना जाता है को मुक़दता सद्र का समर्थन अमरीका और सऊदी अरब के विपरीत होगा।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब के विदेश मंत्री आदिल अलजबीर की इराक यात्रा से इस देश में मतभेद नई श्रृंखला शुरू हो गई है, और मीडिया के इन कदमों से वॉशिंगटन और सऊदी अरब की शैतानी नीतियां शुरू हो चुकी है, जबकि मुक़दता सद्र की हत्या अमेरिका और सऊदी अरब के लाभ में होगा, और अरब उनकी हत्या का आरोप ईरान या अन्य प्रतिरोधी समूहों पर आता है तो आले सऊद और ट्रम्प सरकार को इसका दोगुना राजनीतिक लाभ होगा।

इस्लामी देशों में अमरीका और उसके ख़ुफ़िया विभाग द्वारा की गई हत्याओं के इतिहास से दो शैतानी शक्तियों इस्राईल और सऊदी अरब द्वारा वित्तीय और जानकारिक सहायता स्पष्ट दिखाई देती है। दूसरे शब्दों में यह कहा जाए की मुक़दता सद्र की हत्या की धमकी में अमरीका और सऊदी अरब का रोल साफ़ दिखाई दे रहा है, हालांकि इराक़ में फ़ितना फैलानी वाली इस परियोजना में इस्राईल की भूमिका अभी तक अस्पष्ट है।

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