امام زاده ها و معصومین

हज़रत मोहसिन की शहादत कैसे हुई, जानें शिया और सुन्नी किताबों से
शिया और सुन्नी स्रोतों में मौजूद ऐतिहासिक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि हज़रत मोहसिन इमाम अली और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा (स.) की संतान थे जो दूसरे ख़लीफ़ा उमर या क़ुनफ़ुज़ द्वारा हज़रत फ़ातेमा ज़हरा को दरवाज़े और दीवार की बीच दबा दिए जाने के कारण शहीद हो गए..
जानें कौन हैं हज़रत अबू तालिब
हज़रत अबू तालिब के ईमान के बारे में सवाल उठाकर उनके कैरेक्टर को गिराने की नाकाम कोशिश शुरू कर दी कि क्या अबूतालिब अल्लाह की वहदानियत (एकेश्वरवाद) और रसूल की नुबूव्वत पर ईमान लाये थे या नहीं? यह सवाल उस महान हस्ती के बारे में में उठाया गया जिनकी गोद में
हज़रत ज़ैनब (स) के जीवन के कुछ पहलू
इस में कोई शक नहीं है कि इमाम हुसैन (अ) के सारे सहाबी और बनी हाशिम इस शहादत के मर्तबे में और पड़ने वाली मुसीबतों में हुसैन (अ) के साथ बराबर के शरीक थे। लेकिन इमाम और दूसरों में फ़र्क़ यह है कि हुसैन (अ) सदाए हक़ बुलंद करने वाले थे जबकि दूसरे इमाम हुसैन
रोक़य्या बिन्तुल हुसैन ऐतेहासिक दस्तावेज़ों में
इमाम हुसैन (अ) की एक तीन साल की बेटी थी इमाम हुसैन (अ) के सर को एक तश्त में रखा था और उसपर एक कपड़ा डाल रखा था, वह उनके सामने लाए और उस पर से कपड़ा हटा दिया। इमाम हुसैन (अ) की बेटी ने उस सर को देखा और पूछा यह किसका सर है? कहाः यह तुम्हारे पिता का सर है
यज़ीद के दरबार में हज़रत ज़ैनब का ऐतिहासिक खुतबा
हे यज़ीद! क्या अब जब कि ज़मीन और आसमान को तूने (विभिन्न दिशाओं से) हम पर तंग कर दिया और और क़ैदियों की भाति हम को हर दिशा में घुमाया, तू समझता है कि हम ईश्वर के नज़दीक अपमानित हो गए और तू उसके नज़दीक सम्मानित हो जाएगा?
करबला में इमाम हुसैन (अ) के इतने भाई हुए शहीद
कर्बला में जिन नेक और अच्छे इंसानों ने सही और कामयाब रास्ते को अपनाया और अपने ज़माने के इमाम के नेतृत्व में बुरे लोगों के मुक़ाबले, अपनी ख़ुशी के साथ जंग की और शहीद हुए उनमें से कुछ वीर ह़ीज़रत अली (अ) के बेटे भी थे जो अमीरूल मोमिनीन (अ) की तरफ़ से इमाम
इब्ने ज़ियाद के दरबार में हज़रत ज़ैनब (स) का ख़ुत्बा
जब असीरों का क़ाफ़ेला दरबारे इब्ने ज़ेयाद में पहुंचा तो इब्ने ज़ेयाद ने पूछा के वह औरत कौन है जो अपनी कनीज़ों के हमराह एक गोशे में बैठी है? आपने जवाब न दिया उसने दो तीन बार इस्तेफसार किया मगर कोई जवाब न पाया फिर कनीज़ों ने जवाब दिया के यह नवासीए रसूल
करबला जाने से पहले काबे की छत पर हज़रत अब्बास का ख़ुत्बा
आठ ज़िलहिज्जा सन साठ हिजरी यानी हुसैनी काफ़िले के कर्बला की तरफ़ कूच करने से ठीक एक दिन पहले क़मरे बनी हाशिम हज़रत अबुल फ़ज़लिल अब्बास (अ) ने ख़ान –ए- काबा की छत पर जाकर एक बहुत ही भावुक और क्रांतिकारी ख़ुत्बा दिया।
ज़ैनब करबला की नायिका
ज़ैनब, शहीदों के ख़ून का संदेश लानी वाली, अबाअब्दिल्लाहिल हुसैन (अ) की क्रांति की सूरमा, अत्याचारियों और उनके हामियों को अपमानित करने वाली, सम्मान, इज़्ज़त, लज्जा, सर बुलंदी और श्रेष्ठता की उच्चतम चोटी पर स्थित महिला का नाम है।
अगर ज़ैनब न होतीं...?
अगर ज़ैनब (स) न होती तो इमामत का सिलसिला चौथे इमाम की इमामत के आरम्भ के बाद ही इस संसार को सबसे तुच्छ, अत्याचारी व्यक्ति के हाथों टूट गया होता। अब्बास महमूद ओक़ाद, कर्बला के बारे में लिखते हैं
हज़रत ज़ैनब और कर्बला की जंग
शिम्र ने कहा उबैदुल्लाह बिन जि़याद ने कहा हैः हुसैनी की सारी औलादों को कत्ल कर दो, उसके बाद जब उसने सैय्यदे सज्जाद को मारने का इरादा किया तो तो ज़ैनब नें जवाब में कहाः वह मारा नहीं जाएगा मगर यह कि मैं भी क़त्ल कर दी जाऊँ
हुसैन के नन्हे सिपाही "अली असग़र" की जीवनी
ज़ियारते नाहियाः सलाम हो हुसैन के बेटे अब्दुल्लाह पर, तीर खाकर, ज़मीन पर गिरा ख़ून में रंगा बच्चा जिसका ख़ून आसमान में चला गया और अपने पिता की गोद में तीर से ज़िब्ह कर दिया गया, अल्लाह तीर चलाने वाले और उसको मारने वाले हुर्मुला बिन काहिल असदी पर लानत करे।
हज़रत अली अकबर की संक्षिप्त जीवनी
कर्बला के मैदान में जब अली अकबर (अ) और हज़रत अब्बास (अ) आये हैं तो चूक़ि अली अक़बर (अ) पैग़म्बरे इस्लाम (स) से बहुत मेल खाते थे इसलिये उमरे साद की सेना वालों ने आपके चेहरे को देखा तो कहाः فتبارک الله احسن الخالقین
हज़रत क़ासिम इबने हसन (अ) का संक्षिप्त परिचय
हमीद ने रिवायत कीः हुसैन के साथियों में से एक लड़का जो ऐसा लगता था कि जैसे चाँद का टुकड़ा हो बाहर आया उसके हाथ में तलवार थी एक कुर्ता पहन रखा था और उसने जूता पहन रखा था जिसकी एक डोरी काटी गई थी और मैं कभी भी यह नही भूल सकता कि वह उसके बाएं पैरा का जूता थ
उम्मुल मोमिनीन हज़रत ख़दीजा (स) की सीरत
हज़रत खदीजा (स) ज़िन्दगी के तमाम तल्ख़ व शीरीं हवादिस में बेसत के बाद पैग़म्बरे इस्लाम (स) की शरीके ग़म रहीं, हमेशा आपकी सलामती की ख़्वाहाँ थी, अपने ग़ुलामों व ख़िदमतगारों को पैग़म्बरे इस्लाम (स) की तलाश में भेजा करती थीं।
सफ़ीरे हुसैन हज़रत मुस्लिम इब्ने अक़ील (अ.)
मुस्लिम रात्रि में कूफ़ा पहुँचे, और एक भरोसेमंद शिया के घर ठहरे, मुस्लिम के कूफ़ा पहुँचने की सूचना कूफे के गलियों और कूचों में फैल गई, शिया उनके पास आते थे और इमाम हुसैन (अ) की बैअत करते थे इतिहास में है कि बारह, अठ्ठारह या इब्ने कसीर के अनुसार चालीस हज़ा