ادعیه و مناجات

आमाले आशूरा
इसके बाद दो रकअत नमाज़े ज़्यारते आशूरा सुबह की नमाज़ की तरह पढ़े फिर दो रकअत नमाज़, ज़्यारते इमाम हुसैन अ. इस तरह कि क़ब्रे इमाम हुसैन अ. की तरफ़ इशारा करे और नियत करे कि दो रकअत नमाज़े ज़्यारत इमाम हुसैन अ. पढ़ता हूँ क़ुरबतन इलल्लाह नमाज़ तमाम करने के बा
मुहर्रम महत्वपूर्ण दिन और आमाल
मोहर्रम की पहली क़मरी साल का पहला दिन है। इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ) से रिवायत हैः जो भी इस दिन रोज़ा रखे, ईश्वर उसकी प्रार्थना को स्वीकार करता है, जिस प्रकार उसने ज़करिया (अ) की दुआ को क़ुबूल किया। (8)
दुआ ए अरफ़ा इमाम हुसैन
फिर आपने अपने चेहरे और आँखों को आसमान की तरफ़ उठाया और आपकी दोनों आँखों से दो मश्कों की तरह आँसू जारी थे फिर आपने बुलंद आवाज़ में कहाः
इमाम सज्जाद की दुआ ए अरफ़ा
यह दुआ इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम की दुआओं की प्रसिद्ध किताब सहीफ़ए सज्जादिया की 47वीं दुआ है जिसकों इमाम (अ) ने अरफ़ा के दिन पढ़ा है इसलिये मोमिनों को चाहिए कि इस दिन बहुत अधिक समय दुआ और तौबा व इस्तेग़फ़ार में बिताएं और यह दुआ पढ़ें