ग़दीर का संदेश

ग़दीर का संदेश
१८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने

ग़दीर का संदेश

१८ ज़िलहिज्जा सन दस हिजरी क़मरी को पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ईश्वर के आदेश पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। आज ही के दिन पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक स्थान पर एक लाख बीस हज़ार हाजियों के बीच एक ख़ुत्बा या भाषण दिया और उसके पश्चात उसी स्थान पर हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।

ग़दीर का संदेश

पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने २३ वर्षों तक ईश्वरीय संदेश को पहुंचाने के अथक प्रयासों के बाद कहा था कि ईश्वर का संदेश पहुंचाने में किसी भी ईश्वरीय दूत को मेरी भांति कठिनाइयां सहन नहीं करनी पड़ीं। अपनी पवित्र आयु के अन्तिम वर्ष और अपने जीवन के आख़िरी हज से वापसी पर ईश्वर के आदेशानुसार पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया। उन्होंने एसे व्यक्ति को अपना उत्तराधिकारी निर्धारित किया जिसने अपने ज्ञान, व्यवहार, वीरता, निष्ठा और बहुत से अन्य सद्गुणों से कई बार यह सिद्ध कर दिया था कि उनके भीतर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम का उत्तराधिकारी बनने की पूर्ण क्षमता पाई जाती है। कहते हैं कि अपने समय के मिथ्याचारियों की शक्ति तथा हज़रत अली अलैहिस्सलाम के संबन्ध में उनके द्वेष के कारण पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम हज़रत अली को अपना उत्तराधिकारी घोषित करने में संकोच कर कर रहे थे किंतु क़ुरआन की आयत इस बात की सूचक है कि ईश्वर ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करने हेतु बाध्य किया। पवित्र क़ुरआन में ईश्वर कहता है कि हे पैग़म्बर! उस संदेश को पहुँचा दीजिये जो आपके ईश्वर की ओर से आप पर नाज़िल हो चुका है और यदि आपने ऐसा न किया तो यह ऐसा है जैसे आपने ईश्वरीय संदेश पहुंचाने का कोई काम अंजाम ही नहीं दिया। अल्लाह लोगों से आप की रक्षा करेगा। हज से वापसी पर पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने ग़दीरे ख़ुम नामक स्थान पर आदेश दिया कि जो लोग यहां तक नहीं पहुंचे हैं उनके आने की प्रतीक्षा की जाए और जो लोग आगे निकल गए हैं उनको वापस बुलाया जाए। जब अधिकतर हाजी उस स्थान पर एकत्रित हो गए जिनकी संख्या एक लाख बीस हज़ार बताई गई है, तो ऊंटों की पालानों से पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के लिए मिम्बर बनाया गया। वे मिम्बर पर गए और उन्होंने बड़े ही मनमोहक ढंग से ईश्वर की प्रशंसा करते हुए एक भाषण दिया। उसके पश्चात पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने लोगों को संबोधित करते हुए हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपना उत्तराधिकारी निर्धारित किया। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वे लोग जो यहां पर उपस्थित हैं और इस संदेश को सुन रहे हैं उनके लिए अनिवार्य है कि अपनी यात्रा की समाप्ति पर वे इस संदेश को अपने क्षेत्र के लोगों तक पहुंचाएं। उसके पश्चात उन्होंने अपने परिजनों को पवित्र क़ुरआन के बराबर बताया और कहा कि प्रलय के दिन तक वे दोनों साथ ही रहेंगे। पैग़म्बरे इस्लाम ने पवित्र क़ुरआन और अपने परिजनों को मुसल्मानों के कल्याण का मार्ग बताया। इस घटना के कुछ समय के पश्चात पैग़म्बरे इस्लाम बीमार हो गए और कुछ दिनों के पश्चात उनका स्वर्गवास हो गया। अब पैग़म्बर सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के उत्तराधिकारी, जिनका प्रशिक्षण पैग़म्बरे इस्लाम ने किया था और जो इस्लाम लाने में अग्रणी रहे और जिन्हें पवित्र क़ुरआन का पूर्ण ज्ञान था पैग़म्बर की उम्मत या समुदाय के भविष्य के प्रति चिन्तित हैं।

ग़दीर का ख़ुत्बाः

लोगों को संबोधित करते हुए पैग़म्बरे इस्लाम ने अपना भाषण इस प्रकार से आरंभ कियाः समस्त प्रशंसा और गुणगान ईश्वर के लिए है। हम उसी से सहायता चाहते हैं, उस पर आस्था रखते हैं और उसी पर हमें भरोसा है। हम अपनी बुराइयों और बुरे कर्मों से मुक्ति पाकर उसकी शरण प्राप्त करने के प्रार्थी हैं। भटके हुए लोगों के लिए उसके अलावा कोई पथप्रदर्शक नहीं है और जिसका वह मार्गदर्शन कर दे उसे कोई रास्ते से भटका नहीं सकता। मैं गवाही देता हूं कि उसके अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं है और मोहम्मद उसके बंदे और दूत हैं। ईश्वर के गुणगान तथा उसकी अनन्यता की गवाही के बाद हे लोगो! मैं यह बताना चाहता हूं कि सर्वज्ञानी और दयावान ईश्वर ने मुझे यह सूचना दी है कि मेरी आयु के दिन पूरे हो चुके हैं तथा मैं शीघ्र ही ईश्वर के निमंत्रण को स्वीकार करके अमर लोक की ओर प्रस्थान करने वाला हूं। हम और आप अपने दायित्वों के प्रति उत्तरदायी हैं। आपका इस बारे में क्या विचार और कहना है? उपस्थित लोगों ने उत्तर दिया कि हम गवाही देते हैं कि आपने संदेश पहुंचाने, शुभचिंतन तथा अपने दायित्व निर्वाह के मार्ग में प्रयत्न में कहीं कोई कसर बाक़ी नही रखी। ईश्वर आपको सर्वोच्च पारितोषिक प्रदान करे। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि क्या आप लोग गवाही देते हैं कि ईश्वर अनन्य है जिसका कोई समकक्ष नहीं और मोहम्मद उसके बंदे तथा दूत हैं और यह कि स्वर्ग, नरक, मौत और प्रलय निश्चित चीज़ें हैं जिनमें कोई संदेह नहीं है और यह कि अंततः ईश्वर मरे हुए लोगों को पुनः जीवित करेगा? सबने एक आवाज़ होकर उत्तर दिया कि बिल्कुल हम इन तथ्यों और सच्ची बातों की गवाही देते हैं। पैग़म्बरे इस्लाम ने कहाः हे ईश्वर तू गवाह रहना। इसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने एक बार फिर कहा कि क्या आप लोगों ने मेरी बात भलीभांति सुन ली? सबने उत्तर दिया है कि हां हे ईश्वर के दूत। फिर पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि निश्चित रूप से मैं दूसरे लोक की ओर रवानगी तथा हौज़े कौसर पर पहुंचने में आप सबसे अग्रणी रहूंगा इस हौज़ की चौड़ाई सनआ और बुसरा के बीच की दूरी के बराबर है। उसके भीतर सितारों की संख्या के बराबर चांदी के जाम और प्याले हैं। देखता हूं कि आप लोग उन दो भारी चीज़ों के साथ क्या बर्ताव करते हैं जो मैं आपके बीच छोड़कर जा रहा हूं? इसी बीच वहां बैठे लोगों में से एक ने कहा कि हे ईश्वर के दूत! वह दो मूल्यवान और महत्वपूर्ण चीज़ें क्या हैं? पैग़म्बरे इस्लाम ने कहा कि उन मूल्यवान चीज़ों में एक क़ुरान है जो ईश्वर और मनुष्य के बीच संपर्क का माध्यम है। अतः उसे मज़बूती से पकड़ लीजिए ताकि सही मार्ग से भटक न जाएं। दूसरी महत्वपूर्ण चीज़ मेरा परिवार और ख़ानदान है। दयावान व कृपालु ईश्वर ने मुझे अवगत करा दिया है कि यह दोनों चीज़ें एक दूसरे से कभी भी अलग नहीं होंगी यहां तक कि मेरे पास हौज़े कौसर पर पहुंच जाएंगी। मैंने हमेशा ईश्वर से दुआ की है कि क़ुरआन और मेरे परिवार के बीच कभी जुदाई न हो। अतः आप लोग उनसे आगे बढ़ने का प्रयास न कीजिए और उनके अनुसरण से इन्कार न कीजिए।

इसके बाद उन्होंने हज़रत अली अलैहिस्सलाम को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और ऊपर उठा कर कहाः जिसका मैं स्वामी हूं, यह अली उसके स्वामी हैं। पैग़म्बरे इस्लाम ने तीन बार अपनी बात दोहराई और हम्बली मुसलमानों के धर्मगुरु, अहमद बिन हम्बल का कहना है कि उन्होंने यह बात चार बार दोहराई। इसके बाद उन्होंने दुआ के लिए अपने हाथ उठाए और कहाः हे ईश्वर! हर उस व्यक्ति को प्रिय रख जो इन्हें प्रिय रखे और हर उस व्यक्ति को शत्रु समझ जो इनसे शत्रुता रखे और इनके सहायकों की सहायता कर और इन्हें अपमानित करने वालों को तू अपमानित कर।  इन्हें सत्य व सत्यता का ध्रुव बना। इसके बाद आप ने कहा उपस्थित लोग यह जानकारी अनुस्थिति लोगों तक पहुंचा दें।

     अभी लोग उस स्थान से उठे नहीं थे कि मुसलमानों को संबोधित करते हुए ईश्वरीय संदेश क़ुरआने मजीद की आयत के रूप में आया कि आज मैंने तुम्हारे धर्म को पूर्ण कर दिया और तुम पर अपनी नेमतों या अनुकंपाओं को पूरा कर दिया तथा इस्लाम को तुम्हारे धर्म के रूप में चुन लिया।

     इस अवसर पर पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमायाः ईश्वर तू सबसे बड़ा है। धन्य है तू धर्म पूर्ण करने पर, नेमतें पूरी करने पर, मेरे अभियान तथा मेरे बाद अली के नेतृत्व व उत्तराधिकार पर प्रसन्न होने पर।

इसके पश्चात लोगों ने हज़रत अली को बधाईया देनी आरंभ कीं। हज़रत अली को बधाई देने वालों में उमर और अबू बक्र सबसे आगे थे। उन्होंने हज़रत अली को संबोधित करते हुए कहा कि बधाई हो आपको हे अबूतालिब के पुत्र आज से आप हर मोमिन पुरुष और महिला के मौला अर्थात स्वामी हैं। इब्ने अब्बास ने भी कहा कि ईश्वर की सौगंध अब हज़रत अली का अनुसरण प्रत्येक पर अनिवार्य हो गया। इसपर हेसान बिन साबित ने कहा कि हे ईश्वर के दूत! आप मुझको अनुमति दीजिए कि मैं हज़रत अली की प्रशंसा में कविता पढूं। पैग़म्बरे इस्लाम ने उन्हें अनुमति दी। इसपर हेसान ने उठकर कहा कि हे क़ुरैश के गणमान्य लोगो! मैं पैग़म्बरे इस्लाम की उपस्थिति में हज़रत अली के उत्तराधिकार के बारे में जिनका अनुसरण सबके लिए अनिवार्य हो गया है कविता पढ़ रहा हूं।  इस कविता के पहले शेर का अनुवाद हैः ग़दीरे ख़ुम के दिन मुसलमानों के पैग़म्बर ने उन्हें पुकारा, तो पैग़म्बर की पुकार को सुनो।

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