पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का संसारिक जीवन

पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का संसारिक जीवन
इमाम अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं अपने पवित्र नबीं का अनुसरण करो! पैग़म्बर ने इस संसार में केवल आवश्यकता भर चीज़ों का उपयोग किया, अपनी निगाहों को उस पर नहीं टिकाया, अपने मुंह को उससे नहीं भरा, दुनिया की तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया

अनुवादकः बुशरा अलवी

दुनिया से दूरी

नहजुल बलाग़ा में इमाम अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं अपने पवित्र नबीं का अनुसरण करो! पैग़म्बर ने इस संसार में केवल आवश्यकता भर चीज़ों का उपयोग किया, अपनी निगाहों को उस पर नहीं टिकाया, अपने मुंह को उससे नहीं भरा, दुनिया की तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया, पेट के लिहाज़ से सबके कमज़ोर और संसार में सबसे अधिक भूखे थे, इस संसार के सारे ख़ज़ाने उनके सामने प्रस्तुत किए गए लेकिन आपने स्वीकार नहीं किया।

जब वह जान लेते थे कि ईश्वर को कोई चीज़ पसंद नहीं है तो वह भी उसे पसंद नहीं करते थे, जो चीज़ ईश्वर की दृष्टि में तुच्छ होती थी वह आपकी निगाहों में भी तुच्छ होती थी।

जो चीज़ें ख़ुदा और उसके रसूल की निगाह में नापसंद थी अगर हम उन्हें पसंद करते और जो चीज़ें उनकी नज़र में तुच्छ थी हम महान समझते तो ईश्वर के आदेशों की अवलेहना और हमारे दुर्भाग्य के लिए यही काफ़ी था। (1)

पैग़म्बरे इस्लाम की सादगी

पैग़म्बरे इस्लाम ज़मीन पर बैठ कर खाना खाते थे और ग़ुलामों की भाति आप बैठा करते थे, अपने जूतों पर स्वंय ही सिया करते थे, गधे की नंगी पीठ (बिना किसी ज़ीन या कपड़े के) पर बैठा करते थे और अपने पीछे दूसरे को भी बिठा लिया करते थे।

एक बार आपने देख कि घर के द्वार पर ऐसा पर्दा लगाया गया है जिसपर चित्र हैं तो आपने अपनी पत्नी से फ़रमाया-

इसे मेरे सामने से हटा दो क्योंकि मैं इसे देखता हूं तो दुनिया की रंगीनियां याद आती हैं। (2)

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(1) अलकाफ़ी जिल्द 6 पेज 486 सोननुन नबी पेज 39
(2) अलकाफ़ी जिल्द 6 पेज 486, सोननुन नबी पेज 40

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