सीरिया द्वारा ईरान को दिए जाने वाले क़ीमतो तोहफ़े पर इस्राईल की बौखलाहट

इस्राईल की चिंता
एक ज़ायोनी न्यूज़ एजेंसी ने बताया है कि बेंजामिन नेतनयाहू की मास्को यात्रा का मक़सद बशार असद की तरफ़ से ईरान को दिए जाने अनमोल तोहफ़े पर रोक लगाना था।

टीवी शिया। तेलअवीव। ज़ायोनी इनटरनेट न्यूज़ एजेंसी “वाला” के सैन्य विश्लेषक ने कहा है कि गुरुवार के दिन इस्राईल के प्रधानमंत्री नेनतयाहू की मास्को यात्रा का मक़सद रूस के राष्ट्रपित से बशार असद द्वारा ईरान को दिए जाने वाले अनमोह तोहफ़े को रोकने के लिए मदद मांगना था।  

अरबी भाषा की इनटरनेट न्यूज़ एजेंसी 21 ने अमीर बू हबूत के हवाले से रिपोर्ट दी है कि नेनतयाहू ने पुतिन को जानकारी दी है जिसमें कहा गया है कि बशार असद ने ईऱान को सीरिया के उत्तर पश्चिम में एक प्राइवेट बंदरगाह बनाने की अनुमति दी है।

इस रिपोर्ट में आया है कि नेतनयाहू ने पुतिन को बताया है कि अगर यह बंदरगाह बनती है तो इस्राईल के लिए बहुत बड़ा ख़तरा होगी और यह ईरान की सैन्य शक्ति को बढ़ा देगा।

बू हबूत ने इस्राईली सेना के एक सूत्र के हवाले से कहाः इस प्रकार की बंदरगाह के निर्माण के बाद अगर इस्राईल हमला करता है तो ईरान अपने मीज़ाइलों की पहुँच को कर कर सकेगा औऱ इस प्रकार पूरा इस्राईल इस बंदरगाह पर स्थापित की जाने वाली ईरानी मीज़ाइलों के निशाने पर होगा।

इस ज़ायोनी अधिकारी के अनुसार पुतिन के सामने इस मसले को इसलिए उठाया गया है ताकि वह असद पर दबाव डाल कर इस प्रकार के किसी भी समझौते को होने से रोक दें।

उन्होंने कहा अगर पुतिन इस समझौते के विरुद्ध कुछ न भी करें तब भी कम से कम वह इस बंदरगाह के विरुद्ध इस्राईल की किसी भी कार्यवाही को समझ सकेंगे।

उन्होंने आगे कहाः इस्राईल इस बंदरगाह के विरुद्ध किसी भी सैन्य आक्रमण के औचित्य के लिए यह दावा कर रहा है कि बंदरगाह अरब देशों के लिए भी ख़तरा है।

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