हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की फ़ज़ीलतें अहले सुन्नत की किताबों से

 हज़रत फ़ातेमा ज़हरा की फ़ज़ीलतें अहले सुन्नत की किताबों से
रसूले की इकलौती बेटी और इमामत एवं रिसालत को मिलाने वाली कड़ी, वह महान महिला जिसकों सारी दुनियां की औरतों का सरदार कहा गया, रसूल जिसका इतना सम्मान करते थे कि आपने म्मेअबीहा यानी अपने बाप की मां कहा, इमामत की सुरक्षा में शहीद होने वाली पहली महिला, वह महिला

सैय्यद ताजदार हुसैन ज़ैदी

रसूले की इकलौती बेटी और इमामत एवं रिसालत को मिलाने वाली कड़ी, वह महान महिला जिसकों सारी दुनियां की औरतों का सरदार कहा गया, रसूल जिसका इतना सम्मान करते थे कि आपने म्मेअबीहा यानी अपने बाप की मां कहा, इमामत की सुरक्षा में शहीद होने वाली पहली महिला, वह महिला जो रहती दुनिया तक के लिए ना केवल महिलाओं बल्कि इस दुनिया के हर इन्सान के लिए नमूना हैं, और हम सबको आपकी पवित्र सीरत से सबक़ लेना चाहिए।

फ़ातेमा ज़हरा (स) उस महान हस्ती का नाम है कि अगर जिसके बारे में क़लम लिखाना आरम्भ करें तो उनकी स्याही समाप्त हो जाए लेकिन उनके फ़ज़ाएल समाप्त नहीं होगे, बोलने वालों की ज़बाने थक जाएंगी लेकिन उनके मर्तबों और महानता को बयान ना कर सकेंगी।

रसूले इस्लाम (स) आपसे कितना प्यार करते थे कि इतिहास में मिलता है कि जब आप किसी यात्रा पर जाते थे तो सबसे बाद में फ़ातेमा ज़हरा (स) से अलविदा करते थे और जब आप यात्रा से वापस आते थे तो सबसे पहले आप से भेंट किया करते थे। ताकि कम से कम समय के लिए फ़ातेमा से जुदा हों।

यह रसूले इस्लाम (स) की वह इकलौती बेटी है जिसके बारे में आपने फ़रमाया हैः फ़ातेमा मेरे जिगर का टुकड़ा है जिसने उसको अज़ीयत एवं पीड़ा दी, जिसने उसको परेशान किया जिसने उस पर अत्याचार किया उसने मुझ पर अत्याचार किया है।

यह वह महान हस्ती है जो आयते ततहीर का केन्द्र बनी जिसमें रसूले इस्लाम (स) अली (अ) और हसनैन (अ) को आपके माध्मय से पहचनवाया गया।

आपनी महानता और श्रेष्ठता से किसी भी मुसलमान को इन्कार नहीं है विशेषकर शिया तो आपको वह मासूम हस्ती समझते हैं जिनके आदेशों का पालन करना वाजिब है।

आपकी महानता के बारे में सुन्नयों और शिया दोनों में विशेष किताबें लिखी गई हैं।

लेकिन हम इस लेख में सुन्नी भाईयों की किताबों में आपके विशेष फ़ज़ाएल से सम्बन्धित कुछ हदीसों को बयान करेंगे।

1. मंसूर बिन मख़रमा से रिवायत है कि रसूले इस्लाम (स) ने हज़रत फ़ातेमा (स) के बारे में फ़रमायाः

فانما ھی بضعۃ منی، یریبنی ما ارابھا، و یوذینی ما آذاھا

निःसंदेह फ़ातेमा मेरा टुकड़ा है, जो चीज़ उसे परेशान करती है वह मुझे परेशान करती है जो उसे पीड़ा देती है वह मुझे पीड़ा देती है।

इस हदीस को बुख़ारी और मुस्लिम के अतिरिक्त बहुत से सुन्नी विद्वानों ने लिखा है

(बुख़ारी, किताबे फ़र्ज़ुल ख़ुम्स बाब मा ज़करहु मिन दिर्इन नबी हदीस 3110)

2. अबू हुरैरा नबी करीम (स) से रिवायत करते हैं

ان ملکا من السماء لم یکن زارنی، فاستاذن اللہ فی زیارتی، فبشرنی او اخبرنی، ان فاطمۃ سیدۃ نساء امتی

निःसंदेह एक फ़रिश्ता जिसने आसमान में मुझसे मुलाक़ात नहीं की थी उसने ख़ुदा से अनुमित ली ताकि मुझसे मुलाक़ात कर सके, उसने मुझे ख़ुशख़बरी या सूचना दी कि फ़ातेमा मेरी उम्मत की औरतों की सरदार हैं।

इस हदीस को बतरानी, हैसमी और मिज़्ज़ी जैसे सुन्नी विद्वानों ने लिखा है जिसमें से हम केवल एक का हवाला यहा पर लिख रहे हैं

(मिज़्ज़ी, तहज़ीबुल कमाल, जिल्द 26 पेज 391)

3. सौबान ने रसूले इस्लाम (स)  से रिवायत की

الحمد للہ الذی انجی فاطمۃ من النار

प्रशंसा है उस ईश्वर की जिसने फ़ातेमा को नर्क (की आग) से दूर रखा।

इस हदीस को निसाई, इब्ने असीर, इब्ने शाहीन, अहमद बिन हंबल, हाकिम नैशापूरी... जैसे विद्वानों ने लिखा है, हम केवल एक हवाला बयान करेंगे।

(मुस्नद अहमद बिन हंबल, जिल्द 5, पेज 278 और 279)

4. अबदुल्लाह बिन मसूद ने रसूले इस्लाम (स) से रिवायत की

ان فاطمۃ حصنت فرجھا، فحرمھا اللہ و ذریتھا علی النار

जान लो कि फ़ातेमा ने अपनी पवित्रता की रक्षा की इसलिए ख़ुदा ने उसको और उसकी औलाद पर (नर्क की) आग को हराम कर दिया

इस हदीस को तबरानी, इब्ने शाहीन और बज़ाज़ जैसे उलेमा ने लिखा है

(इब्ने शाहीन, फ़ज़ाएले फ़ातेमा, पेज 26, हदीस 12)

5. इमाम अली (अ) ने रसूले इस्लाम (स) से रिवायत की कि आपने फ़ातेमा से फ़रमाया

ان اللہ یغضب لغضبک و یرضی لرضاک

निःसंदेह ख़ुदा तुम्हारे क्रोध से क्रोधित और तुम्हारी ख़ुशी पर प्रसन्न होता है।

इस हदीस को तबरानी, हैसमी, हाकिम नैशापूरी, अबू नईम इस्फ़हानी आदि ने लिखा है

(तबरानी, मोजमुल कबीर, जिल्द 1 पेज 108, हदीस 182 और जिल्द 22, पेज 401, हदीस 1001)

6. इमाम अली (अ) ने रसूले इस्लाम (स) से रिवायत की

اذا کان یوم القیامۃ قیل: یا اھل الجمع غضوا انصارکم حتی تمر فاطمۃ بنت محمد، فتمر و علیھا ریطان خضراوان ۔ او حمران

जब क़यामत का दिए आएगा तो कहा जाएगाः हे महशर को लोगों, अपनी आँखों को नीची कर लो, ताकि मोहम्मद की बेटी फ़ातेमा ग़ुज़र जाए, जब्कि वह लाल या हरे दो कपड़े पहन कर वहां से गुज़रेंगी

इस हदीस को तबरानी, अबू नईम इस्फ़हानी, हाकिम नैशापूरी जैसे उलेमा ने लिखा है

(हाकिम नाशापूरी, अलमुसतदक अलल सहीहैन, जिल्द 3, पेज 153, और आपने इस हदीस को मुस्लिम और बुख़ारी की शर्तों के अनुसार सही जाना है।)

स्पष्ट रहे कि हमने इस लेख में केवल हदीसों को बयान किया है और केवल उनको अनुवाद की हक तक रखा है, हमने इन हदीसों को विस्तिरित रूप से खोलने से परहेज़ किया है, अन्यथा केवल एक ही हदीस काफ़ी थी कि उसपर एक लेख क्या कई किताबें लिख दी जाती।

इन हदीसों के अतिरिक्त भी बहुत सी हदीसे हैं जो आपके सम्मान और महानता को बयान करती है, लेकिन हम उनको यहां पर बयान नहीं कर रहे हैं क्योंकि हमारी आज कर की भाग दौड़ भरी जि़न्दगी में ना किसी के पास इतना टाइम है और ना फ़ुर्सत कि वह बड़े बड़े लेखों को पढ़ सके।

अगर हमारे पाठकों को इस बारे में और भी जानना हो तो हमको अवश्य लिखें।

यह हदीसें जो यहां बयान की गई हैं इनके बारे में हवाले एवं स्रोत बहुत अधिक हैं लेकिन हमने इस लेख में केवल एक ही स्रोत के बारे में लिखा है।

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