जुहूर का मसला इमाम ज़माना की हदीसों में

जुहूर का मसला इमाम ज़माना की हदीसों में
पैग़म्बरे इस्लाम के आख़िरी जानशीन और इस ज़माने में अल्लाह की आख़िरी हुज्जत व तमाम मुसलमानों के आख़िरी इमाम, इमामे ज़माना (अज) की ग़ैबत और उनके ज़ुहूर का मसला उन मसाएल में से है जिन पर शिया और सुन्नी हर आहले क़लम ने कुछ न कुछ लिखा है, लेकिन ग़ैबत के मसले..

बुशरा अलवी

पैग़म्बरे इस्लाम के आख़िरी जानशीन और इस ज़माने में अल्लाह की आख़िरी हुज्जत व तमाम मुसलमानों के आख़िरी इमाम, इमामे ज़माना (अज) की ग़ैबत और उनके ज़ुहूर का मसला उन मसाएल में से है जिन पर शिया और सुन्नी हर आहले क़लम ने कुछ न कुछ लिखा है, लेकिन ग़ैबत के मसले और इमाम के ज़ुहूर को हमने ख़ुद इमाम की हदीसों से देखने की कोशिश की है, इन्शाअल्लाह आपको पसंद आएगी।

इमाम का वजूद और ज़ुहूर की दुआ

قال المَهدي(عج): إنّ الأرضَ لا تخلوا من حُجّةٍ : إمّا ظاهراً أو مغموراً.

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : ज़मीन हुज्जत (अल्लाह के प्रतिनिधि) से कभी खाली नहीं हो सकती, या वह प्रत्यक्ष होगा या अप्रत्यक्ष।

(कमालुद्दीन शेख़ सदूक़, जिल्द 2, पेज 115)

 

 قال المَهدي(عج): أَكْثِرُوا الدُّعَاءَ بِتَعْجِيلِ الْفَرَجِ فَإِنَّ ذَلِكَ فَرَجُكُم

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : ज़ुहूर की शीघ्रता के लिये बहुत अधिक दुआ करो, निःसंदेह वही तुम्हारी फ़रज और ख़ुशहाली है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 53, पेज 180)

हक़ और बातिल की लड़ाई

قال المَهدي(عج): إذا أَذِنَ الله لنا في القول ، ظَهرَ الحقُّ واضمَحَلَّ الباطلُ وانحسَرَ عنكم

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : जब अल्लाह हमको बोलने (प्रत्यक्ष रूप से सामाजिक कार्यों में हस्तक्षेप की) अनुमति देगा, हक़ ज़ाहिर होगा और बातिल समाप्त हो जाएगा और घुटन तुमसे दूर हो जाएगी।

(बिहारुल अनवार जिल्द 25, पेज 183)

قال المَهدي(عج): أبى الله عز وجل للحق إلا إتماما وللباطل إلا زهوقاً وهو شاهد عليّ بما أذكره.

व इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : अल्लाह को नागवार है हक़ मगर यह कि उसको पूर्ण कर दे और अंत तक पहुँचा दे, और नागवार है बातिल मगर यह कि उसको समाप्त कर दे और अल्लाह गवाह है उस पर जो मैं कह रहा हूँ (हक़ विजयी और बातिल समाप्त होने वाला है)

(यानी अल्लाह हक़ को कमज़ोर या आधी अधूरी सूरत में देखना पसंद नहीं करता है बल्कि अल्लाह की मंशा तो यह है कि हक़ जो की अल्लाह का सच्चा दीन है उसको पूरी तरह से ज़ाहिर कर दे चाहे मुशरेकीन को यह नागवार ही क्यों न हो, और अल्लाह की मंशा यह है कि वह इस ज़मीन औरा कायनात के बातिल न नाम व निशान मिटा दे और यही अल्लाह के अद्ल का तक़ाज़ा है)

(बिहारुल अनवार जिल्द 53, पेज 193)

ज़ोहूर का समय और निशानियां

قال المَهدي(عج): وأمّا ظهور الفَرَج ،فإنّه إلى الله (تعالی ذکره) وكَذِب الوقّاتون.

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : लेकिन जुहूरे फ़रज (इमाम ज़माना) का संबंध अल्लाह की अनुमित और इरादे से और जो लोग ज़ोहूर के लिये समय निश्चित करते हैं झूठे हैं।

(कमालुद्दीन जिल्द 2, पेज 484)

قال المَهدي(عج): علامة ظهور أمري كَثرَةُ الهَرَجِ والمَرجِ والفِتن

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : मेरे जुहूर की निशानी (दुनिया में) अराजकता, अव्यवस्था और फ़ितनों का बढ़ जाना है।

(बिहारुल अनवार जिल्द 51, पेज 320)

قال المَهدي(عج): إنّه لم يكن أحدٌ من آبائي إلاّ وقد وقعت في عنقه بيعةٌ لطاغيةِ زمانه ، وإني أخرج حين أخرج ، ولا بيعةَ لأحدٍ من الطواغيت في عنقي.

इमाम महदी (अ) ने फ़रमाया : निःसंदेह हमारे पूर्वजों में से कोई नहीं था मगर यह कि उस पर उनके ज़माने के किसी अत्याचारी की हुकूमत थी, और मैं अपने ज़ुहूर और कयाम के समय उठूंगा इस अवस्था में कि किसी भी अत्याचारी की हुकूमत और सत्ता मेरी गर्दन पर नहीं होगी।

(कमालुद्दीन, शेख़ सदूक़, जिल्द 2, पेज 485)

 

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