म्यांमार के मुसलमानों का दर्द, मुझे नहीं पता मेरे पति और बेटे को क्यों मारा!!

समीराना रहमत करीम ने म्यांमार से भाग कर बंग्लादेश पहुँचने के बाद मुस्लिम बस्ती आराकान पर म्यांमार सेना के हमले, बर्बरता एवं मौत के नंगे नाच की कहानी लोगों तक पहुंचाई है।

समीराना रहमत करीम ने म्यांमार से भाग कर बंग्लादेश पहुँचने के बाद मुस्लिम बस्ती आराकान पर म्यांमार सेना के हमले, बर्बरता एवं मौत के नंगे नाच की कहानी लोगों तक पहुंचाई है।

समीराना के अनुसार हम लोग अराकान के मोन्गों शहर के पास हतीवारा गाँव में सुकून से जी रहे थे कि एक दिन अचानक सेना ने हमारे गाँव पर हमला कर दिया, घरों में आग लगा दी उसके बाद से हमारा जीवन अजीरन हो गया, हम घर से बाहर निकलने से भी डरते थे, हर तरफ़ डर और भय का माहौल था।

इस रोहंगियन मुसलमान महिला ने आगे बतायाः एक दिन सेना के एक जवान ने एक घर में आग लगाई और मेरे पाँच साल के बेटे मोहम्मद रफ़ीक़ को आग में फेंक दिया, मेरा बेटा मेरी आँखों के सामने जल गया।

उन्होंने बतायाः उसके बाद सेना के जवानों ने खेत में काम कर रहे मेरे पति पर हमला किया, मेरा पति एक अध्यापक था नमाज़ के समय उस पर हमला किया, जब उसने भागना चाहा तो हवाई फ़ायर कर के उसको पकड़ लिया और उसकी गर्दन काट दी।

समीराना ने बतायाः मैं डर कर अपने रिश्तेदारों के गाँव की तरफ़ भागी लेकिन वहाँ की भी हालत मेंरे गाँव से भिन्न न थी, जिसके बाद हमने बंग्लादेश भागने के फैसला किया, हमने भागने के लिए जंगल का रास्ता नहीं चुना क्योंकि वहां सेना ने बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं, हम नदी के रास्ते भाग कर बंग्लादेश पहुँचे हैं।

इस पीड़ित महिला ने बतायाः मैं केवल अपने एक बेटे और बेटी को ही निकाल सकने में कामयाब हो सकी लेकिन मेरे दूसरे तीन बेटों का क्या हुआ मुझे कुछ नहीं पता, मुझे यह भी नहीं मालूम है कि म्यांमार सेना ने हम को क्यों मारा?!!