सऊदी अरब ने इस्राईल के सहयोग से पवित्र शहर मक्के के विरुद्ध रची यह भयानक साज़िश

सऊदी अरब ने इस्राईल के सहयोग से पवित्र शहर मक्के के विरुद्ध रची यह भयानक साज़िश
अरब देश के एक उच्च सुरक्षा सूत्र ने पवित्र शहर मक्का के बारे में सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन की साज़िश से पर्दा उठाया है।

अरब देश के एक उच्च सुरक्षा सूत्र ने पवित्र शहर मक्का के बारे में सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन की साज़िश से पर्दा उठाया है।

टीवी शिया, अरब देश के एक उच्छ सुरक्षा सूत्र ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है कि सऊदी अधिकारी इस्राईल की मदद से यमन के सीमावर्तीय क्षेत्र से पवित्र शहर मक्के पर हमला करने की फिराक़ में हैं।

इस सूत्र का कहना है कि यमन के विरुद्ध सऊदी अरब की जारी जंग और उसमें सऊदी अरब की नाकामी और लगातार हरा के बाद अब सऊदी अरब यमन के अंसारुल्लाह पर पवित्र शहर मक्का पर हमला करने का आरोप लगाने की साज़िश रच रहा है।

इस सूत्र ने बताया है कि सऊदी अरब किसी भी कीमत पर दुनिया के मुसलमानों के यमन की सेना और स्वंयसेवी बलों के विरुद्ध एकजुट करना चहाता है चाहे काबे की बरबादी का बहाना ही क्यों न बनाना पड़े।

सऊदी अरब ने अभी पिछले दिनों ही यह दावा किया था कि उन्होंने पवित्र शहर मक्के से 65 किलोमीटर दूरे एक मीज़ाइल को ट्रैक करके उसको गिराया है।

दूसरी तरफ़ अंसारुलल्ह के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुस्सलाम ने सऊदी अरब के इस दावे पर प्रतिक्रया देते हुए कहाः सऊदी अधिकारियों का कहना है कि यमन की तरफ़ से एक मीज़ाइल फ़ायर किया गया है जिसको पवित्र शहर मक्के से 65 किलोमीटर पहले ट्रैक करके गिरा दिया गया, अगर यह बात सही है तो सऊदी अधिकारी पवित्र शहर मक्का का नाम लाकर मुसलमानों की भावनाएं भड़काने के बजाए यह भी कह सकते थे कि बरकार मीज़ाइन का निशाना जद्दा था (जद्दह शहर मक्के से 65 किलोमीटर की दूरी पर है) सऊदी अरब का यह बयान सरारस झूठ और साज़िश है।

उन्होंने कहाः यमन के लोग अमरीका की नौकरी करने वाले सऊदी अरब से ज़्यादा पवित्र इस्लामी स्थलों का सम्मान करते हैं।

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