सऊदी विदेशमंत्री की बग़दाद यात्रा के पीछे का सच

सऊदी अरब
सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने इराक़ी अधिकारियों को आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध प्रतिरोध और इराक़ियों की कामयाबी पर मुबारकबाद दी।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने इराक़ी अधिकारियों को आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध प्रतिरोध और इराक़ियों की कामयाबी पर मुबारकबाद दी।

बेशर्मी का रिकार्ड तोड़ते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने इराक़ी अधिकारियों को आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध प्रतिरोध और इराक़ियों की कामयाबी पर मुबारकबाद दी जब कि अमरीकी और यूरोपीय दस्तावेज़ों के अनुसार ख़ुद सऊदी अरब के ही इन आतंकवादियों के सबसे बड़ा हथियार और पैसा देने वाला देश है, और इराक़ी निर्दोश जनता का ख़ून बहाने वाले लगभग 65 प्रतिशत आतंकवादी भी सऊदी अरब के हैं।

अलजबीर ने अपने झूठे बयान में कहा कि रियाज़ का दृष्टिकोण इराक़ के सभी गुटों और राजनीतिक पार्टियों के लिए एक जैसा है जब कि इराक़ के सरकारी स्वंयसेवी बल हश्द अलशाबी का सऊदी अरब द्वारा अपमान किसी से ठका छिपा नहीं है, उन्होंने इस स्वंयसेवी बल के लिए कहा थाः हश्द अलशाबी एक साम्प्रदायिक समूह है जिसका ईरान समर्थन कर रहा है। जब कि सबको पता है कि हश्द अलशाबी ही वह समूह है जिसने आतंकवादियों विशेष कर दाइश के विरुद्ध इराक़ियों की जीत की कहानी लिखनी शुरू की थी।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के राजदूत सामिर सुबहान को इराक़ से निकाले जाने और उसके बाद इराक़ और रियाज़ के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बाद आदिल अलजबीर का यह इराक़ दौरा मक़सद के तहत किया गया है, और इस दौरे को पीछे के लक्ष्यों को इराक़ के विदेश मंत्री इब्राहीम अलजाफ़री के बयान से समझा जा सकता है कि उन्होंने कहाः रियाज़ और तेहरान के अंधकारमयी संबंधों के लिए बग़दाद बेहतरीन रास्ता है। निसंदेह सऊदी अरब की यह वापसी उसके हित में है जो कि इस समय यमन के दलदल में फंसा हुआ है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि अलजबीर की इस यात्रा का मक़सद जाफ़री की ज़बान से बयान किया गया है, यानी रियाज़ ने बग़दाद से विनती की है कि वह ईरान को उनके देश के बीच मध्यस्थता करे।

दूसरे कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब बग़दाद और क़ाहेरा के बीच सुधरते संबंधों को लेकर चिंतित है, क्योंकि मिस्र के समाचार पत्र अलअहराम ने अपने 23 फ़रवरी के संस्करण में क़ाहेरा में इराक़ के राजदूत मोहम्मद हादी के हवाले से अलग कुछ ही समय में दस लाख लीटर तेल इराक़ से मिस्र निर्यात किए जाने के बारे में लिखा जब कि इससे पहले तक मिस्र हमेशा सऊदी अरब से तेल का आयात किया करता था जिसके कारण मिस्र को हमेशा सऊदी अरब के सामने सर झुका कर रखना पड़ता था।

लेकिन इस दौरे का सच यह है कि मिस्र की सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले अपने फैसले में मिस्रे के तीरान और सनाफ़ीर द्वीपों को सऊदी अरब को दिए जाने के आदेश पर रोक लगा दी, जिसने रियाज़ को क्रोधित कर दिया जिसके बाद आले सऊद सरकार ने वली अह्द के सलाहकार मोहम्मद बिन सलमान के कहने पर मिस्र के होश ठिकाने लगाने के लिए सऊदी अरब की कंपनी आरामको के माध्यम से मिस्र को दिए जाने वाली तेल सहायता पर रोक लगा दी। लेकिन बग़दाद-क़ाहेरा के बीच के इस समझौत ने सऊदी अरब की प्लानिंग पर पानी फेर दिया है इसी लिए अलजबीर ने बग़दाद का दौरा किया है ताकि इराक़ी अधिकारियों को यह समझा सकें कि वह मिस्र को तेल न दें।

जिस चीज़ ने क़ाहेरा-रियाज़ के बीच संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बनाया है वह संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में रूस द्वारा सीरिया की सुरक्षा में दिया गया वोट है। रियाज़ रूस के इस फ़ैसले को सीरिया के राष्ट्रपति बशार अशद का समर्थन मानता है जब कि संयुक्त राष्ट्र में मिस्र के प्रतिनिधि उमर अब्दुल लतीफ़ ने अपने देश के इस रुख़ के लिए कहा है कि वह अरब नागिरकों की इस हालत को देख कर थक गया है कि वह किस प्रकार कुछ देशों के हाथों में खेल बन कर रह गए हैं, उनका तात्पर्य, सऊदी अरब, क़तर और संयुक्त अरब अमीरात था। उनके इस बयान कि तुरंत बाद सऊदी मीडिया ने मिस्री प्रतिनिधि की निंदा करनी शुरू कर दी और धमकी दी कि रियाज़ क़ाहेरा को दी जाने वाली सहायता को रोक देगा।

सऊदी अरब की धमकी के बाद मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह सीसी ने एक सम्मेलन में कहाः सीरिया के बारे में मिस्र का रुख़ स्वतंत्र है और हम किसी भी धमकी से पीछ हटने वाले नहीं है, हम केवल अल्लाह के लिए ही पीछे हटने वाले हैं

सीसी ने 20 अक्टूबर को पुर्तग़ाल के टीवी चैनल से कहा थाः सीरिया की जनता पाँच साल से अधिक समय से आतंकवाद और विदेशी हस्तक्षेप से जूझ रही है, हम सीरियाई जनता की सोच और फ़ैसले का सम्मान करते हैं और हमारा मानना है कि आतंकवादियों तक हथियार पहुँचने से रोकना चाहिए।

 

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