आले ख़लीफ़ा सरकार द्वारा 3 कार्यकर्ताओं को दी मौत की सज़ा दिए जाने की तस्वीरें

बहरैनी की आले ख़लीफ़ा सरकार की तरफ़ से 3 कार्यकर्ताओं को 2014 के बम हमले में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में मौत की सज़ा के फ़ैसले पर जनता के आक्रोश के बावजूद, इस शासन ने उन्हें मौत की सज़ा दे दी।

बहरैनी की आले ख़लीफ़ा सरकार की तरफ़ से 3 कार्यकर्ताओं को 2014 के बम हमले में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में मौत की सज़ा के फ़ैसले पर जनता के आक्रोश के बावजूद, इस शासन ने उन्हें मौत की सज़ा दे दी।

बहरैनी शासन ने इन कार्यकर्ताओं को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन के बावजूद रविवार को गोली मारकर सज़ा दी।

लंदन स्थित लूलू टेलीविजन नेटवर्क के अनुसार, इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ पूरे मनामा में शनिवार को आक्रोश में भरी जनता ने रैली निकाली जो रविवार तक जारी रही। पूर्वोत्तरी गांव नुवैदरात और अज़्ज़ाइर में सुबह की नमाज़ के बाद जनता ने रैली निकाली।

9 जनवरी को बहरैन के अपील कोर्ट ने सामी मुशैमा, अब्बास जमील ताहिर अश्शामी और अली अब्दुश शाहिद अस्सिन्गासी को मार्च 2014 में उत्तरी गांव अज़्ज़ाही में बहरैनी जनता के प्रदर्शन के दमन में मनामा शासन की मदद कर रहे संयुक्त अरब इमारात के कई सैनिकों को मारने के आरोप में दी गयी सज़ा को बाक़ी रखा था। इन कार्यकर्ताओं ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद कहा था। इस मामले में 7 और लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा दी गयी है।

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के ख़िलाफ़ शुरु हुयी प्रदर्शन की नई लहर, बहरैनी बुद्धजीवियों की ओर से राष्ट्र से “तीन बेगुनाह कार्यकर्ताओं की ज़िन्दगी बचाने के कोशिश” के तहत सड़कों पर आने की अपील के बाद शुरु हुई है।

 

आले ख़लीफ़ा का अत्याचार
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