अपने जैसे मुसलमान तैयार करने का मिशन

अपने जैसे मुसलमान तैयार करने का मिशन
वहाबी विचारधारा रखने वालों की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह अपने अतिरिक्त किसी भी दूसरे को काफिर मानते हैं चाहे वह इस्लाम के किसी भी समुदाय से ही संबंध क्यों न रखता हो, चाहे वह सुन्नी हो या शिया या किसी और पंथ का मानने वाला, और यही कारण है कि कुछ लोग वहाबी

बुशरा अलवी

कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा के वहाबी कहलाने वाले मुसलमानों का यक़ीन है कि इस्लाम का सबसे सुनहरा दौर पैग़म्बर मोहम्मद और उनके बाद के चार शासकों का था.

वो उसी दौर में वापस जाने की मांग करते हैं. इस विचारधारा का ये भी मानना है कि एक सच्चा मुसलमान वही है जो इस्लाम की सर्वोच्चता को माने और इसका प्रचार करे.

वहाबी विचारधारा रखने वालों की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह अपने अतिरिक्त किसी भी दूसरे को काफिर मानते हैं चाहे वह इस्लाम के किसी भी समुदाय से ही संबंध क्यों न रखता हो, चाहे वह सुन्नी हो या शिया या किसी और पंथ का मानने वाला, और यही कारण है कि कुछ लोग वहाबी समुदाय के तकफ़ीरी यानी दूसरों को काफ़िर कहने वाला समुदाय भी कहते हैं।

देखें वहाबियों को सुन्नियों से अलग करती दस चीज़ें

भारत में भी वहाबी समुदाय के मानने वाले आपको मिल जाएंगे और इस समय वहाबी समुदाय का सबसे बड़ा चेहरा भारत में ज़ाकिर नाइक का है जिसने बंग्लादेश में आतंकवादी घटना और उसमें लिप्त आतंकवादियों द्वारा नाइक से प्रेरित होने के बयान के बाद ख़ूम सुर्खियां बटोरी हैं।

ज़ाकिर सालों पहले अफ़्रीक़ा के इस्लामी प्रचारक अहमद दीदात से मिलता है और यहीं से उसकी जिंदगी नया रुख़ लेती है, दीदात के बाद नाइक ने अपने गुरु दीदात के मक़सद को ही अपना मक़सद बना लिया और जी जान से इस्लाम के प्रचार में जुट गया।

उन्होंने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ़) की स्थापना की. अपने भाषणों को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए पीस टीवी नाम से टीवी चैनल शुरू किया. इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने के लिए स्कूलों की स्थापना की.
मुंबई के मज़गांवन इलाक़े में ऊंची दीवारों और बड़े दरवाज़े से घिरे इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल को चलाने वाली संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन एजुकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं ज़ाकिर नाइक. वो आईआरएफ़ के भी अध्यक्ष हैं. इस पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है. स्कूल पर कोई पाबंदी नहीं है. लेकिन स्कूल के बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है.

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स्कूल में कैम्ब्रिज इंटरनेशनल बोर्ड - IGCSE पाठ्यक्रम चलता है, जहाँ पढ़ाई अंग्रेजी में होती है.पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईआरएफ पर पाबंदी लगा दी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फाउंडेशन और नाइक से जुड़े दूसरे दफ्तरों में छापे माकर उन्हें सील कर दिया.

ज़ाकिर नाइक पर चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और विभिन्न समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने का इल्ज़ाम है. ज़ाकिर नाइक ने अपना जो हुलिया बनाया है वह एक प्रकार से आधुनिक और परंपरागत मुसलमानों का मिलाजुला रूप है वह कोट पैंट टाई के साथ सर पर टोपी लगाते हैं और लंबी दाढ़ी रखते हैं. और इस प्रकार जहां आधुनिक सोंच रखने वाले मुसलमानों के बीच अपना पकड़ मज़बूत बानाते हैं तो टोपी और दाढ़ी रूढ़ीवादी मुसलमानों को उनका मुरीद बनाते हैं और आम मुसलमान इस रुख में देख कर उनको अपने जैसा मुसलमान समझते रहते हैं जिसका फ़ायदा उठाकर वह मुसलमानों के दिमाग़ों में तकफ़ीर और वहाबियत का ज़हर घोलते रहते हैं।

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आज सारी दुनिया जानती है कि भारत ही क्या पूरे संसार में जब तक वहाबियत का अस्तित्व वजूद में नहीं आया था तब तक सारा संसार इस्लाम को एक शांतिप्रिय धर्म के तौर पर मान्यता देता था लेकिन इब्ने तैमिया के बाद अब्दुल वह्हाब द्वारा नज्द में वहाबियत के प्रचार और उसके बाद सऊदी शासन द्वारा उसकी हर प्रकार से सहायता के बाद जैसे ही इन शैतानी फ़िर्क़े ने दुनिया में अपने पैर पसारे इस्लाम का चेहरा पूरी दुनिया में कुरूप कर दिया कल तक जो इस्लाम शाति का प्रतीक था आज वह आतंकवाद के धर्म के तौर पर दुनिया में देखा जाने लगा है अगरचे इस्लाम के इस रूप को दुनिया से सामने लाने में साप्रदायिक और साम्राजी शक्तियों ने बिकी हुई मीडिया के साथ पर प्रकार के हथकंडे अपनाए ताकि दुनिया में तेज़ी से बढ़ती इस्लामी सभ्यता को रोका जा सके और लोगों के बीच इस्लाम के प्रति घृणा का भाव पैदा किया जा सके। (बहरहाल यह अपने स्थान पर पूरे एक विषय है जिसके बारे में किसी और लेख में राय व्यक्त करेंगे)

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कहा जाता है कि ज़ाकिर नाइक की कमाई फाउंडेशन के ज़रिए बिकने वाली इस्लाम पर लिखी उनकी किताबें और उनके भाषणों की डीवीडी और सीडी से होती है. लेकिन वास्तविक्ता से सारी दुनिया वाक़िफ़ है कि वहाबी संगठनों और उनके फाइंडेशनों की कमाई का वास्तविक स्रोत सऊदी अरब, क़तर और यहूदी लॉबी है जो इनको पैसा देती है ताकि वह दुनिया में इस्लाम को बदनाम कर सकें।

लेकिन ढाका की घटना से भारतीय सरकार ने सबक लेते हुए इस सपोले का मुंह कुचलने का कार्य किया है और जहां ज़ाकिर नाइक पर भारतीय एजेंसियों की नज़र है वही उसके पीस चैनल को भारत में प्रतिबंधित कर दिया लेकिन दुबई में यह चैनल अभी भी चल रहा है.

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