मोहर्रम के सदाबहार नौहे + एलबम

जब भी इमाम हुसैन के ग़म और उन पर सोगवारी की बात आती है तो दुनिया का हर इंसान अपने अपने अंदाज़ में अलग अलग तरह से फ़ातेमा ज़हरा को उनके लाल हुसैन का पुरसा देता है कोई उन पर किताब लिखता है तो कोई लेख और कोई पेंटिग या किसी और तरह से अपने ग़म को बयान करता है

जब भी इमाम हुसैन के ग़म और उन पर सोगवारी की बात आती है तो दुनिया का हर इंसान अपने अपने अंदाज़ में अलग अलग तरह से फ़ातेमा ज़हरा को उनके लाल हुसैन का पुरसा देता है कोई उन पर किताब लिखता है तो कोई लेख और कोई पेंटिग या किसी और तरह से अपने ग़म को बयान करता है लेकिन तमाम चीज़ों में नौहे और मरसियों का अपना अलग मक़ाम है जिसकी तारीख़ हमको मासूमीन के ज़माने से आज तक मिलती है। इसी तारीख़ को आगे बढ़ाते हुए हम आपके सामने हुसैन की मज़लूमिय और को बयान करने वाले सदाबहार नौहे लेकर आए है